क्रिसमस 2013 पर श्री श्री मृणालिनी माता का संदेश

“सभी सीमाओं के बंधन तोड़ कर अपनी चेतना के पालने को इतना विशाल
बनाऐं जिसमें अनंत शिशु जीसस का आगमन हो सके।”

— श्री श्री परमहंस योगानन्द

गुरुदेव परमहंस योगानन्दजी के आश्रमों में, हम सब की ओर से आप को क्रिसमस की शुभकामनाएं, और प्रार्थनाएं, कि प्रभु जीसस के सम्मान में इस पुनीत अवसर पर उस असीम क्राइस्ट के प्रेम का अनुभव आप अपनी भक्ति और ध्यान-चेतना के द्वारा कर सकें जो उनके जीवन में व्याप्त था। जब हृदय और मन ईश्वर की कृपा के स्पर्श के लिए अनावृत होते हैं, जो उन लोगों के माध्यम से प्राप्त होती है जिनमें ईश्वर का प्रकाश शुद्ध रूप में प्रतिबिंबित है, तो ईश्वर की दिव्यता से पृथक करने वाला भ्रामक पर्दा हमारे सामने से हट जाता है। इस तनाव ग्रस्त संसार का अंधकार दूर हो जाता है और शांति हमारे अस्तित्व में भर जाती है। हमारे सच्चे, असीम स्वभाव की आत्मा-स्मृति के साथ-साथ हमारे भीतर नई आशा का संचार होता है। यह सार्वभौमिक क्राइस्ट की चेतना के सदा नवीन उपहार हैं, जो हमें प्राप्त होते हैं।

जीसस का सफल जीवन हम में साहस और विश्वास उत्पन्न करने के लिए उदाहरण है, कि हम भी अपने अंतर में स्थित ईश्वरीय चेतना को प्रकट कर सकते हैं जो कि ईश्वर के आशीर्वादों और हमारी आंतरिक ग्रहणशीलता के माध्यम से जागृत होने की प्रतीक्षा में है। जैसे-जैसे व्यक्तियों का हृदय परिवर्तन होगा, वैसे वैसे मानवता की चेतना में भी, प्रेम और सत्य के नियमों के अनुसार जीवन व्यतीत करने वालों के शुभ स्पंदनों से प्रभावित हो कर, परिवर्तन आएगा। उस परिवर्तन को लाने में हम में से प्रत्येक को अपनी भूमिका निभानी है, जैसे जैसे हम अपनी चेतना को विस्तृत करते हैं ताकि हम जीसस में निहित अनन्त क्राइस्ट को ग्रहण कर सकें। हम में और उस सार्वभौमिक क्राइस्ट की उपस्थिति में कोई बाधा नहीं है, यदि है तो केवल हमारे मन तथा हृदय में। “यदि आप की इच्छा है कि आपकी चेतना में क्राइस्ट बोधगम्य हो”, गुरुदेव कहते थे, “तो आपको सभी अवरोधों को हटाना होगा।” मन में यह मुक्तिदायक विचार रख कर कि आप अपनी चेतना के विशाल विस्तार से माया और अहंकार की आशंकाओं और पूर्वाग्रहों द्वारा निर्मित बाधाएं हटा सकते हैं, क्रिसमस की तैयारियों का शुभारम्भ करें। जब हम आक्रोश और आलोचनात्मक स्वार्थपरता का परित्याग कर देते हैं तो हमें कितनी शांति का अनुभव होता है और उसके स्थान पर हम जीसस की आत्मसात करने वाली भावना और विनम्रता पा जाते हैं, जिसे कोई बाह्य पहचान की आवश्यकता शेष नहीं होती, और वह सब को क्षमा कर देने वाला प्रेम जिसे उन्होंने कठिनतम परीक्षाओं में भी शत्रुता की भावना से अछूता रखा। जैसे जैसे आप आत्मा की मुक्ति के गुणों को अपने अंतर में विकसित करेंगे, आप क्राइस्ट के प्रेम और क्राइस्ट की शांति को अपने हृदय में ला पाएंगे जो क्रिसमस की सच्ची भावना है।

जीसस का अनुभव था कि ईश्वर अंतर के गहन मौन में प्रकट होते हैं। उस समय ह्रदय में ऐसा प्रेम उमड़ता है जिसे संभालना संभव ही नहीं होता है और इस वृत्त का दायरा वृहत से वृहत होता जाता है जिसमें हमारे साथ और सब की आत्माएं समाहित हो जाती हैं। उस एकत्व की अनुभूति ईश्वर प्रदत्त उच्चतम उपहार है। जैसे आप सार्वभौमिक क्राइस्ट को अपनी आत्मा के मंदिर में ग्रहण करें और अपने विचार और कर्म में उनका सम्मान करें, आपकी क्रिसमस का आनंद पूर्ण हो और नव वर्ष में प्रतिदिन आप के साथ रहे, आपके जीवन में क्राइस्ट की उपस्थिति के ज्ञान में नित्य-वृद्धि के साथ।

आपको एवं आपके परिजनों के लिए आनंदमय क्रिसमस की शुभकामनाएं,

श्री मृणालिनी माता

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