राजनीतिक एवं प्रशासनिक विभूतियाँ

“यदि परमहंस योगानन्द जैसा व्यक्ति आज संयुक्त राष्ट्र में होता, सम्भवतः विश्व वर्तमान से बेहतर स्थान होता।”

— डॉ बिनय र सेन,अमरीका में भारत के भूतपूर्व राजदूत

“उनके प्रति मैं सर्वोच्च सम्मान रखता हूँ….मैंने योगानन्द के साथ कई वर्ष तक गंभीर पत्राचार कर, विभिन्न विषयों पर विचार-विनिमय किया है। उनके पत्र मेरे लिए बहुत प्रेरणात्मक और सहायक थे। उनका निधन मानवता के लिए विचारणीय क्षति है।”

— महामहिम एमिलो पोर्ट्स गिल,मेक्सिको के भूतपूर्व राष्ट्रपति

“उनका हार्दिक व्यक्तित्व और संवेदनापूर्ण समझदारी की कमी, उन सभी को, कष्टदायी रूप से महसूस होगी, जिन्हें उनको जानने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।”

— गुडविन जे नाइट,कैलिफ़ोर्निया के भूतपूर्व गवर्नर

“निश्चित ही वह एक उत्कृष्ट व्यक्ति थे, जो पृथ्वी के लोगों के बीच समझदारी व शाँति के लिए समर्पित थे। वास्तव में यह कह सकते हैं कि उन्होंने यहाँ होने भर से, विश्व को कुछ बेहतर छोड़ा ....”

— जज स्टेनली मॉस्क,सुप्रीम कोर्ट ऑफ स्टेट ऑफ़ कैलिफ़ोर्निया

“परमहंस योगानन्द की वैज्ञानिक शिक्षाएँ व चर्चाएँ मानव सभ्यता की यात्रा में महत्त्वपूर्ण पड़ाव हैं।”

— जी एन वैद्य,जस्टिस ऑफ हाई कोर्ट, मुंबई

“मैं इस अवसर का उपयोग आपको वह लाभ बताने के लिए कर रहा हूँ, जो मुझे आपके हाल ही में पिट्सबर्ग में दिए गए शैक्षिक व्याख्यानों से, प्राप्त हुए। मैं जानता हूँ कि आप इस देश में एक महान रचनात्मक शैक्षिक कार्य कर रहे हैं और आपको हर सम्भव सहायता और प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए। यदि लोग आपके द्वारा सिखाए गए सिद्धांतों का अनुसरण करें, तो नैतिक न्यायालय के अस्तित्व की बहुत कम या कहें न के बराबर उपयोगिता रह जाएगी।”

— ए.डी.ब्रांडन, जज ऑफ द मॉरल्स कोर्ट,पिट्सबर्ग , पी ए

“वॉशिंगटन में मनोचिकित्सकों का अपना योगदान रहा है। लेकिन यह अच्छी तरह से सार्वभौमिक साक्ष्य है कि आपका दर्शनशास्त्र और प्रणाली एक पूर्णतया नया अनुभव था....आपके व्याख्यानों और कक्षाओं से मेरी पत्नी और मुझे कितना लाभ हुआ, मैं आपके समक्ष व्यक्त करने में असमर्थ हूँ। आधुनिक अमरीकी जीवन की अनिश्चितताओं, तन्त्रिकाओं और चिन्ताओं के साथ साथ आध्यात्मिक समझदारी की भूख ने, जो व्यावहारिक जीवन की कठोर वास्तविकताओं युक्त हमारी पारम्परिक क्रिस्चन आस्था से ताल मेल बैठा सकें, हमें आपकी तलाश के लिए प्रेरित किया। आपके उत्कृष्ट और व्यावहारिक दर्शनशास्त्र को सुन कर हमें शान्ति और सांत्वना मिली है।

— लुइस ई वान नॉर्मन, सम्पादक, “द नेशन्स बिसनेस”; कमर्शियल अटैची, डिपार्टमेंट ऑफ कॉमर्स

“उनके शारीरिक सौष्ठव एवं सम्मोहन से अलग, जो कि निस्सन्देह उनकी आत्मा का सूचक था, परमहंस जी के मानवता के प्रति गहन स्नेह व प्रेम—उनके लिए भी था जो उनकी आस्था के प्रति अनिच्छुक और विमुख थे—समकालीनों के बीच उनका कद इतना ऊँचा कर दिया जिससे मुकाबला मुश्किल था।

“वह जहाँ जन्में उस देश से, आत्मा की निर्मलता और जीवन के मानवीय व आध्यात्मिक मूल्यों को, अमरीका लाये, जिन्होंने न केवल बहुत से छोटे-बड़े को आधुनिक समाज में मानसिक शाँति प्राप्त करने में सहायता की बल्कि भारत और संयुक्त राज्य के लोगों के बीच समझ बनाने में भी सहायता की।

“एक शांतिदूत और मानवीय भाईचारे में विश्वास रखने वाले के रूप में, योगानन्द जी ने अपना जीवन समस्त ऊर्जा एवं उपलब्ध संसाधन, पूर्व और पश्चिम के बीच मैत्री और समझदारी के ध्येय को समर्पित कर दिए।”

— मुल्क राज आहूजा,काउंसल जनरल ऑफ़ इंडिया

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